श्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को बंबई (अब मुंबई) में हुआ था। उनका ज़्यादातर बचपन तीन मूर्ति भवन में श्री जवाहर लाल नेहरू के साथ बीता। दून स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद श्री गांधी आगे की पढ़ाई के लिए ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज और इंपीरियल कॉलेज (लंदन) गए, जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली। इंग्लैंड से घर लौटने पर उन्होंने कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया और बतौर पायलट इंडियन एयरलाइंस में कार्य करना शुरू किया।

31 अक्टूबर, 1984 को श्री गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। अपनी माँ श्रीमती इंदिरा गांधी की शहादत की पीड़ा झेलते हुए भी उन्होंने असाधारण धैर्य और गरिमा के साथ देश की सेवा करने का बीड़ा उठा लिया। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने करोड़ों भारतीयों के दिल में उम्मीदों और संभावनाओं की अलख जगा दी। आधुनिक ख़यालात के होते हुए भी श्री गांधी का भारत की संस्कृति और सभ्यता से अगाध प्रेम था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संचार, बुनियादी ढांचे के विकास और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में यदि आज भारत एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभरा है, तो वह श्री गांधी के नेतृत्व में की कई पहलों का ही परिणाम है।

शिक्षा: श्री गांधी ने भारत की साक्षरता दर में सुधार करने के लिए कई उत्कृष्ट प्रयास किए। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) और जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना हुई। भारत में शिक्षा को एक नई दिशा और नया बल प्रदान करने के उद्देश्य से 1986 की नई शिक्षा नीति उन्हीं के कार्यकाल में लाई गयी।
पर्यावरण: प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में श्री गांधी की रुचि पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों में दिखाई देती है। धरती और जीवन के लिए आसन्न संकट को भांपते हुए उन्होंने संसद में पर्यावरण (संरक्षण) विधेयक, 1986 पेश किया। इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया और 23 मई, 1986 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। इसके अलावा श्री गांधी ने 1952 की राष्ट्रीय वन नीति की समीक्षा भी कराई और 1988 की नई वन नीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नई नीति ने वन संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर बल दिया। भारत की सर्वप्रथम जल नीति भी राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद द्वारा 1987 में तभी अपनाई गई जब श्री राजीव गांधी इस परिषद् के अध्यक्ष थे।

अर्थव्यवस्था का उदारीकरण: 2 जून, 1988 को श्री गांधी की सरकार ने नई औद्योगिक नीति की घोषणा की जिसमें कई उद्योगों को लाइसेंस रहित किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल था। इस नीति से औद्योगीकरण को भरपूर बल मिला। साथ ही, अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की भी एक मजबूत नींव पड़ी।

विकेंद्रीकरण: श्री राजीव गांधी मानते थे कि विकास का फायदा जमीनी स्तर पर तभी पहुँचेगा जब सत्ता का वास्तविक विकेन्द्रीकरण हो। इसलिए पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना उनकी विकास योजना का सबसे अहम हिस्सा बन गया। उनकी देख-रेख में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए संविधान में संशोधन करने हेतु एक विधेयक का मसौदा तैयार किया गया। 15 मई, 1989 को इसे लोकसभा में संविधान के 64वें संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया।

शांति को बढ़ावा: अपने पूरे कार्यकाल में श्री गांधी एक शांतिदूत की भाँति रहे थे। अपने प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान भाषा, जाति और धर्म के आधार पर बँटे एक देश में उन्होंने ऊर्जा, उत्साह और का संचार किया। अपना पद ग्रहण करने के बाद उन्होंने सबसे पहले पंजाब समस्या का समाधान करने का संकल्प किया, जिसकी वजह से देश में अशांति फैली हुई थी। 25 जुलाई, 1985 को श्री राजीव गांधी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष संत श्री हरचरण सिंह लोंगोवाल के बीच पंजाब समझौता पर हस्ताक्षर किए गए।

असम में संघर्ष छिड़ने के बाद 15 अगस्त, 1985 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में श्री राजीव गांधी ने असम समझौते के रूप में इसके निवारण के लिए एक ज्ञापन की घोषणा की।

30 जून, 1986 को मिजोरम शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसपर आंदोलन के नेता श्री लालडेंगा, तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव श्री आरडी प्रधान और मिजोरम सरकार के मुख्य सचिव ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते ने मिजोरम को एक 40-सदस्यीय विधानसभा वाले पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया। 20 फरवरी, 1987 को मिजोरम एक राज्य बन गया। 29 जुलाई, 1987 को कोलंबो में भारत-श्रीलंका समझौते पर श्री राजीव गांधी और श्री जयवर्धने ने हस्ताक्षर किए।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: श्री राजीव गांधी ने परमाणु निरस्त्रीकरण को अपनी विदेश नीति के प्रमुख मुद्दे के रूप में चुना। नि:शस्त्रीकरण के वैश्विक अभियान के हिस्से के रूप में श्री राजीव गांधी और सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव श्री मिखाइल गोर्बाचेव ने 27 नवंबर, 1986 को एक परमाणु हथियार मुक्त और अहिंसक विश्व का आह्वान करनेवाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। दिल्ली घोषणा-पत्र परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इस प्रयास में सोवियत संघ की भागीदारी ने अभियान को काफी महत्ता प्रदान कर दी। यह श्री गांधी की एक प्रमुख उपलब्धि साबित हुई। वह पूरी तरह समर्पित होकर और दृढ़ता से निरस्त्रीकरण अभियान की अगुआई कर रहे थे।

श्री राजीव गांधी ने दो बार अमेरिका की यात्रा की। पहली बार 1985 में और दूसरी बार 1987 में। इन यात्राओं से भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को बहुत बल मिला और द्विपक्षीय व्यापार में भी बहुत बढ़ोतरी हुई। दोनों ही देशों के निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग भी तेज हो गया। भारत-अमेरिका सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक सहयोग कोष की स्थापना भी इसी अवधि के दौरान हुई। भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान श्री राजीव गांधी की चीन यात्रा भी एक बड़ी सफलता थी। इससे उनका यह विश्वास और भी दृढ़ हुआ कि भारत और चीन के बीच संबंधों का परिमाप बहुत बड़ा है।

Copyright 2019 All Rights Reserved

We Need Your Support

MAKE A Donation

Quis autem velum iure reprehe nderit. Lorem ipsum dolor sitelit. Cras sapien neqqrue, biben dum in sagittis. Nulla or narjusto laoreet onse ctetur adipiscing.

Donation Collected
Donation Needed
Payment Cycle
How much would you like to donate?
OR
Select your payment option